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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 42 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 3

1.42.3

Mantra ID: 1.42.3

अप॒ त्यं प॑रिप॒न्थिनं॑ मुषी॒वाणं॑ हुर॒श्चित॑म् । दू॒रमधि॑ स्रु॒तेर॑ज ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.42.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तुम हमारा रास्ता रोकने वाले चोर एवं कुटिल व्यक्ति को हमारे मार्ग से दूर भगा दो. (३)

EN English Translation

Drive away the thief and the crooked person who is blocking our way away from our path. (3)

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