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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 42 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 4

1.42.4

Mantra ID: 1.42.4

त्वं तस्य॑ द्वया॒विनो॒ऽघशं॑सस्य॒ कस्य॑ चित् । प॒दाभि ति॑ष्ठ॒ तपु॑षिम् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.42.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देव! हमारे सामने और पीठ पीछे दोनों प्रकार से हमारा धन हरण करने वाले अनिष्टसाधक चोर के परपीड़क शरीर को अपने पैरों से कुचल दो. (४)

EN English Translation

Oh, Dev! Crush with your feet the sadistic body of the evil thief who has taken away our wealth both in front of us and behind our backs. (4)

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