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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 42 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 5

1.42.5

Mantra ID: 1.42.5

आ तत्ते॑ दस्र मन्तुमः॒ पूष॒न्नवो॑ वृणीमहे । येन॑ पि॒तॄनचो॑दयः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.42.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ज्ञानसंपन्न एवं शत्रुनाशक पूषा! तुमने जिस रक्षाशक्ति से अंगिरा आदि पूर्वजों को प्रेरित किया था, हम तुम्हारी उसी शक्ति की प्रार्थना करते हैं. (५)

EN English Translation

O god of wisdom and enemies! We pray for the same power of defence with which you inspired the ancestors of Angira etc. (5)

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