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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 18 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 10

4.18.10

Mantra ID: 4.18.10

गृ॒ष्टिः स॑सूव॒ स्थवि॑रं तवा॒गाम॑नाधृ॒ष्यं वृ॑ष॒भं तुम्र॒मिन्द्र॑म् । अरी॑ळ्हं व॒त्सं च॒रथा॑य मा॒ता स्व॒यं गा॒तुं त॒न्व॑ इ॒च्छमा॑नम् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.18.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

एक बार ब्याई हुई गाय जिस प्रकार बछड़े को जन्म देती है, उसी प्रकार अदिति ने अपनी इच्छा से कामवर्षी एवं अजेय इंद्र को जन्म दिया. वे अधिक अवस्था वाले, बलसंपन्न, प्रेरणा करने वाले एवं चलने के लिए शरीर के इच्छुक हैं. (१०)

EN English Translation

Just as a cow once married gives birth to a calf, Aditi gave birth to a lustful and invincible Indra of her own free will. They are more stateful, forceful, inspiring and willing to move the body. (10)

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