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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 45 • Mantra / Rik 24

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 24

6.45.24

Mantra ID: 6.45.24

कु॒वित्स॑स्य॒ प्र हि व्र॒जं गोम॑न्तं दस्यु॒हा गम॑त् । शची॑भि॒रप॑ नो वरत् ॥ (२४)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.45.24 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दस्युवधकर्तता इंद्र कुवित्स की अनगिनत गायों वाली गोशाला में गए. इंद्र ने अपनी बुद्धि से उन छिपी हुई गायों को प्रकट किया. (२४)

EN English Translation

The bandit went to the goshala of Indra Kuvits with countless cows. Indra revealed those hidden cows with his wisdom. (24)

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