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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 45 • Mantra / Rik 27

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 27

6.45.27

Mantra ID: 6.45.27

स म॑न्दस्वा॒ ह्यन्ध॑सो॒ राध॑से त॒न्वा॑ म॒हे । न स्तो॒तारं॑ नि॒दे क॑रः ॥ (२७)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.45.27 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! महान्‌ धन के उददेश्य से दिए हुए सोमरस से तुम प्रसन्न बनो तथा अपने स्तोता को निंदक के अधिकार में मत करो. (२७)

EN English Translation

O Indra! Be pleased with the somras given for the purpose of great wealth and do not possess your hymns to the blasphemer. (27)

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