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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 45 • Mantra / Rik 28

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 28

6.45.28

Mantra ID: 6.45.28

इ॒मा उ॑ त्वा सु॒तेसु॑ते॒ नक्ष॑न्ते गिर्वणो॒ गिरः॑ । व॒त्सं गावो॒ न धे॒नवः॑ ॥ (२८)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.45.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तुतियों द्वारा प्रशंसनीय इंद्र! प्रत्येक बार सोमरस निचुड़ जाने पर हमारी स्तुतियां उसी प्रकार तुम्हारे पास पहुंचती हैं, जिस प्रकार दुधारू गाएं बछड़ों के पास जाती हैं. (२८)

EN English Translation

O Indra admirable by the praises! Each time our eulogies go to you every time we go to Somers, just as the milch cows go to the calves. (28)

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