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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 24 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 17

8.24.17

Mantra ID: 8.24.17

इन्द्र॑ स्थातर्हरीणां॒ नकि॑ष्टे पू॒र्व्यस्तु॑तिम् । उदा॑नंश॒ शव॑सा॒ न भ॒न्दना॑ ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.24.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे हरि नामक अश्चों के स्वामी इंद्र! पूर्ववर्ती ऋषियों द्वारा की गई तुम्हारी स्तुति को कोई शक्ति अथवा धन के कारण नहीं लांघ सकता. (१७)

EN English Translation

O Indra, lord of the aschas called Hari! No one can take away the praise of you praised by the former sages because of power or money. (17)

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