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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 32 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 11

8.32.11

Mantra ID: 8.32.11

यः सं॒स्थे चि॑च्छ॒तक्र॑तु॒रादीं॑ कृ॒णोति॑ वृत्र॒हा । ज॒रि॒तृभ्यः॑ पुरू॒वसुः॑ ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.32.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र संग्राम में अनेक वीरतापूर्ण कार्य करने वाले शन्रुवधकर्तता, वृत्रहंता एवं स्तोताओं को अधिक अन्न देने वाले हैं. (११)

EN English Translation

Those who have done many heroic acts in the Indra Sangram are going to give more food to the Shanruvadkarta, Vrithrahanta and The Stotas. (11)

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