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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 32 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 12

8.32.12

Mantra ID: 8.32.12

स नः॑ श॒क्रश्चि॒दा श॑क॒द्दान॑वाँ अन्तराभ॒रः । इन्द्रो॒ विश्वा॑भिरू॒तिभिः॑ ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.32.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे शक्तिशाली इंद्र हमें भी शक्तिशाली बनावें. दानशील इंद्र अपने सभी रक्षासाधनों द्वारा हमारे दोषों को दूर करें. (१२)

EN English Translation

Those mighty Indras make us even more powerful. May the charitable Indra remove our faults by all his defense means. (12)

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