Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 44 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 12

8.44.12

Mantra ID: 8.44.12

अ॒ग्निः प्र॒त्नेन॒ मन्म॑ना॒ शुम्भा॑नस्त॒न्वं१॒॑ स्वाम् । क॒विर्विप्रे॑ण वावृधे ॥ (१२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.44.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बुद्धिमान्‌ अग्नि प्राचीन एवं सुंदर स्तोत्रों द्वारा अपने शरीर को सुशोभित बनाते हुए मेधावियों के साथ बढ़ते हैं. (१२)

EN English Translation

Intelligent agni grows with meritorious people, adorning their body with ancient and beautiful stotras. (12)

卐 HinduText AI