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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 35

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 35

8.45.35

Mantra ID: 8.45.35

बि॒भया॒ हि त्वाव॑त उ॒ग्राद॑भिप्रभ॒ङ्गिणः॑ । द॒स्माद॒हमृ॑ती॒षहः॑ ॥ (३५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.35 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारे समान उग्र, शत्रुओं पर प्रहार करने वाले, पापों को क्षीण करने वाले एवं शत्रुओं की हिंसा करने वाले देव के कारण मैं भयरहित बनूं. (३५)

EN English Translation

O Indra! I may be without fear because of God who is as fierce as you, who attacks enemies, who undermines sins, and who does violence against enemies. (35)

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