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8.45.36
मा सख्युः॒ शून॒मा वि॑दे॒ मा पु॒त्रस्य॑ प्रभूवसो । आ॒वृत्व॑द्भूतु ते॒ मनः॑ ॥ (३६)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.36 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अधिक धन वाले इंद्र! मैं तुमसे तुम्हारे मित्र एवं पुत्र की वृद्धि की बात कहता हूं. तुम्हारा मन मुझसे न फिरे. (३६)
EN English Translation
O Indra with more wealth! I tell you about the growth of your friend and son. Don't let your mind turn from me. (36)