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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 48 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 5

8.48.5

Mantra ID: 8.48.5

इ॒मे मा॑ पी॒ता य॒शस॑ उरु॒ष्यवो॒ रथं॒ न गावः॒ सम॑नाह॒ पर्व॑सु । ते मा॑ रक्षन्तु वि॒स्रस॑श्च॒रित्रा॑दु॒त मा॒ स्रामा॑द्यवय॒न्त्विन्द॑वः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.48.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह पिए हुए, यशकारक एवं रक्षण के इच्छुक सोम मुझे इस प्रकार यज्ञकर्मो से बांध दें, जिस प्रकार बधिया बैल रस्सी की गांठों द्वारा रथ से बंधा रहता है. सोम मुझे भ्रष्ट चरित्र से बचावें एवं व्यभिचार से दूर करें. (५)

EN English Translation

This drunk, successful and willing to protect Mon binds me to the yagnakarmas in such a way that the badhiya bull is tied to the chariot by rope rope ropes. Mon protect me from corrupt character and remove me from adultery. (5)

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