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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 48 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 6

8.48.6

Mantra ID: 8.48.6

अ॒ग्निं न मा॑ मथि॒तं सं दि॑दीपः॒ प्र च॑क्षय कृणु॒हि वस्य॑सो नः । अथा॒ हि ते॒ मद॒ आ सो॑म॒ मन्ये॑ रे॒वाँ इ॑व॒ प्र च॑रा पु॒ष्टिमच्छ॑ ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.48.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! पीने के बाद तुम मुझे मथित अग्नि के समान भली प्रकार दीप्त करो, भली प्रकार देखो एवं अतिशय धनशाली बनाओ. मैं तुम्हारे मद के लिए स्तुति करता हूं. तुम धनवान्‌ बनकर पुष्ट बनो. (६)

EN English Translation

Hey Mon! After you have drunk, let me shine well like a churned agni, and look well and make me very rich. I praise you for your item. You become rich and be strong. (6)

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