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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 51 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 1

8.51.1

Mantra ID: 8.51.1

प्रो अ॑स्मा॒ उप॑स्तुतिं॒ भर॑ता॒ यज्जुजो॑षति । उ॒क्थैरिन्द्र॑स्य॒ माहि॑नं॒ वयो॑ वर्धन्ति सो॒मिनो॑ भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तयः॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.51.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! इंद्र सेवा करते हैं, इसलिए उनके पास जाकर स्तुति करो. लोग सोमरस पीने वाले इंद्र के अन्न को उवथ मंत्रों द्वारा बढ़ाते हैं. इंद्र के दान कल्याण करने वाले हैं. (१)

EN English Translation

Hey Ritvijo! Indra serves, so go to him and praise him. People increase the grain of Indra, who drinks somras, through uwatha mantras. Indra's donations are welfare-doers. (1)

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