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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 51 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 10

8.51.10

Mantra ID: 8.51.10

उज्जा॒तमि॑न्द्र ते॒ शव॒ उत्त्वामुत्तव॒ क्रतु॑म् । भूरि॑गो॒ भूरि॑ वावृधु॒र्मघ॑व॒न्तव॒ शर्म॑णि भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तयः॑ ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.51.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अनेक पशुओं वाले एवं धनस्वामी इंद्र! जो लोग तुम्हारे द्वारा दिया हुआ सुख भोगते हैं, वे तुम्हारे बल को तुम्हें एवं तुम्हारे यज्ञों को अधिक मात्रा में बढ़ाते हैं. इंद्र का दान कल्याणकारक है. (१०)

EN English Translation

O many animals and wealthy Indra! Those who enjoy the pleasures you have given increase your strength to you and your sacrifices to a greater extent. Indra's charity is beneficial. (10)

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