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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 51 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 11

8.51.11

Mantra ID: 8.51.11

अ॒हं च॒ त्वं च॑ वृत्रह॒न्सं यु॑ज्याव स॒निभ्य॒ आ । अ॒रा॒ती॒वा चि॑दद्रि॒वोऽनु॑ नौ शूर मंसते भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तयः॑ ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.51.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वृत्रहंता इंद्र! जब तक धन प्राप्त न हो जाए, तब तक हम और तुम मिलकर रहें. हे वज्रधारी एवं शूर इंद्र! दान न देने वाला भी तुम्हारे दान की प्रशंसा करता है. इंद्र के दान कल्याणकारक हैं. (११)

EN English Translation

O Vrithrahanta Indra! You and I will stay together until you receive the money. O Vajradhari and Shur Indra! The non-donor also praises your donation. Indra's donations are welfare. (11)

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