Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 4 • Dashati / Sukta 12 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 4 • दशती / सूक्त 12 • मन्त्र 8

4.12.8

Mantra ID: 4.12.8

अभि त्यं देवँ सवितारमोण्योः कविक्रतुमर्चामि सत्यसवँ रत्नधामभि प्रियं मतिम् । ऊर्ध्वा यस्यामतिर्भा अदिद्युतत्सवीमनि हिरण्यपाणिरमिमीत सुक्रतुः कृपा स्वः ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 4.12.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सविता! हम आप की उपासना करते हैं. आप कवि, सत्यवान व अत्यंत प्रिय हैं. आप का प्रकाश पृथ्वीलोक से अंतरिक्षलोक तक फैलता है. आप सुनहरे प्रकाश वाले हैं. आप हम यज्ञ करने वालों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं. (८)

EN English Translation

O Savita! We worship you. You are a poet, truthful and very dear. Your light spreads from earth to space. You are golden light. You keep your grace on those who perform yajna. (8)

卐 HinduText AI