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सामवेद

Chapter / Prapathak 4 • Dashati / Sukta 12 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 4 • दशती / सूक्त 12 • मन्त्र 7

4.12.7

Mantra ID: 4.12.7

अया रुचा हरिण्या पुनानो विश्वा द्वेषाँसि तरति सयुग्वभिः सूरो न सयुग्वभिः । धारा पृष्ठस्य रोचते पुनानो अरुषो हरिः । विश्वा यद्रूपा परियास्यृक्वभिः सप्तास्येभिरृक्वभिः ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 4.12.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप का रस हरे रंग का है. परिष्कृत सोमरस शन्रुनाशक है. उस की धारा चमकीली और तमहारी (अंधकार दूर करने वाली) है. परिष्कृत हरी व लाल आभा वाला सोमरस चमकता हुआ शोभित होता है. उस की सात रंगों वाली किरणें अनेक रूप धारण करती हैं. (७)

EN English Translation

O Mon! Your juice is green. Refined somerus is a disinfectant. Its stream is bright and tamhari (remover of darkness). Somerus with a refined green and red aura is glazed. Its seven-color rays take many forms. (7)

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