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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 3 • Mantra 22

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 3 • मन्त्र 22

10.3.22

Mantra ID: 10.3.22

यथा॒ यशो॑ऽग्निहो॒त्रे व॑षट्का॒रे यथा॒ यशः॑ । ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु । तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा ॥ (२२)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.3.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्निहोत्र एवं वषट्‌ करने से जिस प्रकार यज्ञ प्राप्त होता है, उसी प्रकार वरण वृक्ष से निर्मित यह मणि मुझे कीर्ति और ऐश्वर्य प्रदान करे. (२२)

EN English Translation

Just as yajna is obtained by doing Agnihotra and Vashat, in the same way, this gem made of varan tree gives me fame and opulence. (22)

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