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10.3.23
यथा॒ यशो॒ यज॑माने॒ यथा॒स्मिन्य॒ज्ञ आहि॑तम् । ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु । तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा ॥ (२३)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.3.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इस यजमान में एवं इस यज्ञ में जिस प्रकार यश स्थित है, वरण वृक्ष से निर्मित यह मणि उसी प्रकार मुझे कीर्ति और ऐश्वर्य प्रदान करे. (२३)
EN English Translation
Just as fame is located in this host and in this yajna, this gem made of varan tree should give me fame and opulence in the same way. (23)