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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 3 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 3 • मन्त्र 7

10.3.7

Mantra ID: 10.3.7

अरा॑त्यास्त्वा॒ निरृ॑त्या अभिचा॒रादथो॑ भ॒यात् । मृ॒त्योरोजी॑यसो व॒धाद्व॑र॒णो वा॑रयिष्यते ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.3.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पुरुष! यह मणि शत्रु से, निर्त्ऋति नामक पाप देवता से, जादूटोने के भय से तथा मृत्यु से तुम्हारी रक्षा करे. (७)

EN English Translation

O man! May this gem protect you from the enemy, from the sin god called Nirtiti, from the fear of witchcraft and from death. (7)

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