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10.7.1
कस्मि॒न्नङ्गे॒ तपो॑ अ॒स्याधि॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्ग॑ ऋ॒तम॒स्याध्याहि॑तम् । क्व व्र॒तं क्व श्र॒द्धास्य॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ स॒त्यम॑स्य॒ प्रति॑ष्ठितम् ॥ (१)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.7.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इस मनुष्य के किस अंग में तपस्या करने की शक्ति स्थित है? इस मनुष्य के किस अंग में सत्य भाषण की क्षमता स्थित है? इस मनुष्य के किस अंग में व्रत अर्थात् दृढ़ निश्चय और श्रद्धा, किस अंग में स्थित रहती है? इस मनुष्य के किस अंग में सत्य प्रतिष्ठित है? (१)
EN English Translation
In which part of this human being is the power to do penance? In which part of this human being is the capacity for true speech located? In which part of this man is the fast, that is, determination and faith, located in which part? In which part of this man is truth established? (1)