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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 7 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 7 • मन्त्र 2

10.7.2

Mantra ID: 10.7.2

कस्मा॒दङ्गा॑द्दीप्यते अ॒ग्निर॑स्य॒ कस्मा॒दङ्गा॑त्पवते मात॒रिश्वा॑ । कस्मा॒दङ्गा॒द्वि मि॑मी॒तेऽधि॑ च॒न्द्रमा॑ म॒ह स्क॒म्भस्य॒ मिमा॑नो॒ अङ्ग॑म् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.7.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस परमेश्वर के किस अंग से अग्नि दीप्त होती है? इस के किस अंग से वायु चलती है? चंद्रमा का निर्माण इस के किस अंग से हुआ है? वह चंद्रमा इस विश्वाधार से किस अंग को नापता है? (२)

EN English Translation

From which part of this God does agni glow? From which part of this does the air move? The moon is formed from which part of it? Which part does that moon measure from this universe? (2)

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