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10.8.17
ये अ॒र्वाङ्मध्य॑ उ॒त वा॑ पुरा॒णं वेदं॑ वि॒द्वांस॑म॒भितो॒ वद॑न्ति । आ॑दि॒त्यमे॒व ते परि॑ वदन्ति॒ सर्वे॑ अ॒ग्निं द्वि॒तीयं॑ त्रि॒वृतं॑ च हं॒सम् ॥ (१७)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.8.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो पुराण, ज्ञानी एवं विद्वान् उस के पीछे, बीच में अथवा चारों ओर बताते हैं, वे सब सूर्य की ही प्रशंसा करते हैं. वे अग्नि को दूसरा और हंस को तीसरा बताते हैं. (१७)
EN English Translation
The Puranas, scholars and scholars who tell behind him, in the middle or around him, they all praise the sun. They call Agni second and Hans third. (17)