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10.8.20
यो वै ते वि॒द्याद॒रणी॒ याभ्यां॑ निर्म॒थ्यते॒ वसु॑ । स वि॒द्वाञ्ज्ये॒ष्ठं म॑न्येत॒ स वि॑द्या॒द्ब्राह्म॑णं म॒हत् ॥ (२०)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.8.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो उन दोनों अणियों को जानता है, जिस के द्वारा धन का मंथन किया जाता है, वही विद्वान् परमात्मा को सब से महान मानता है और वही महान वेद मंत्रों को जानता है. (२०)
EN English Translation
The one who knows those two anis, through whom wealth is churned, the same scholar considers God to be the greatest and he knows the great Veda mantras. (20)