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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 8 • Mantra 19

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 8 • मन्त्र 19

10.8.19

Mantra ID: 10.8.19

स॒त्येनो॒र्ध्वस्त॑पति॒ ब्रह्म॑णा॒र्वाङ्वि प॑श्यति । प्रा॒णेन॑ ति॒र्यङ्प्राण॑ति॒ यस्मि॑ञ्ज्ये॒ष्ठमधि॑ श्रि॒तम् ॥ (१९)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.8.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वह सत्य की सहायता से ऊपर तपता है तथा वेद मंत्रों के द्वारा नीचे की ओर देखता है. वह प्राण वायु में तिरछी सांस लेता है, उसी में वह सब से महान परमात्मा स्थित है. (१९)

EN English Translation

He heats up with the help of truth and looks down through Veda mantras. That soul breathes obliquely in the air, in him he is the greatest God. (19)

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