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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 1 • Mantra 23

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 1 • मन्त्र 23

11.1.23

Mantra ID: 11.1.23

ऋ॒तेन॑ त॒ष्टा मन॑सा हि॒तैषा ब्र॑ह्मौद॒नस्य॒ विहि॑ता॒ वेदि॒रग्रे॑ । अं॑स॒द्रीं शु॒द्धामुप॑ धेहि नारि॒ तत्रौ॑द॒नं सा॑दय दै॒वाना॑म् ॥ (२३)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.1.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ब्रह्मा ने इस वेदी का निर्माण किया. हिरण्यगर्भ ने इसे स्थापित किया एवं ब्रह्मौदन को पकाने के लिए महर्षियों ने इस वेदी की कल्पना की. हे पत्नी! तू देवों, पितरों और मनुष्यों के भागों को धारण करने वाली इस वेदी के समीप बैठ तथा देवों के इस भाग को पका. (२३)

EN English Translation

Brahma built this altar. Hiranyagarbha installed it and the Maharishis conceived this altar to cook The Brahmaudana. You sit near this altar that holds the parts of gods, ancestors and human beings and cook this part of the gods. (23)

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