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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 1 • Mantra 31

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 1 • मन्त्र 31

11.1.31

Mantra ID: 11.1.31

ब॒भ्रेर॑ध्वर्यो॒ मुख॑मे॒तद्वि मृ॒ड्ढ्याज्या॑य लो॒कं कृ॑णुहि प्रवि॒द्वान् । घृ॒तेन॒ गात्रानु॒ सर्वा॒ वि मृ॑ड्ढि कृ॒ण्वे पन्थां॑ पि॒तृषु॒ यः स्व॒र्गः ॥ (३१)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.1.31 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्यु! ऋत्विज्‌ का भरणपोषण करने वाले पके हुए भात का मुंह शुद्ध करो. हे विद्वान्‌ अध्वर्यु! ओदन में घी डालने के लिए गडा बनाओ. इस के पश्चात बटलोई के भाग के सभी अंगों को घी से चिकना करो. इस ओदन के द्वारा मैं पूर्वजों के अभिलषित स्वर्ग का मार्ग बनाऊंगा. (३१)

EN English Translation

O Adhwaryu! Purify the mouth of the ripe rice that sustains the ritvij. O scholar, Adhwaryu! Make a gada to add ghee to the oven. After this, smooth all the parts of the part of the batloi with ghee. Through this odan, I will make the way to the desired heaven of the ancestors. (31)

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