Popular:
अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 10 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 10 • मन्त्र 1

11.10.1

Mantra ID: 11.10.1

यन्म॒न्युर्जा॒यामाव॑हत्संक॒ल्पस्य॑ गृ॒हादधि॑ । क आ॑सं॒ जन्याः॒ के व॒राः क उ॑ ज्येष्ठव॒रोभ॑वत् ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 11.10.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ब्रह्म माया के अभिमुख उसी प्रकार प्राप्त हुआ, जिस प्रकार पति पत्नी के सामने जाता है. ब्रह्म ने माया को उसी प्रकार प्राप्त किया, जिस प्रकार पति अपनी पत्नी को घर से प्राप्त करता है. ब्रह्मा की सृष्टि रचना की इच्छा में वधू पक्ष के बंधन कौन थे? कन्या का वरण करने वाले कौन थे? उस समय प्रधान वर अर्थात्‌ विवाह करने वाला कौन था? (१)

EN English Translation

Brahman attained the face of Maya in the same way as the husband goes in front of the wife. Brahma received Maya in the same way as a husband receives his wife from home. Who were the bonds of the bride's side in Brahma's desire to create creation? Who were the ones who chose the girl? Who was the chief groom at that time? (1)

卐 HinduText AI