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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 10 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 10 • मन्त्र 11

11.10.11

Mantra ID: 11.10.11

य॒दा केशा॒नस्थि॒ स्नाव॑ मां॒सं म॒ज्जान॒माभ॑रत् । शरी॑रं कृ॒त्वा पाद॑व॒त्कं लो॒कमनु॒ प्रावि॑शत् ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.10.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस सृष्टि रचना के समय रचना करने वाले ने केशों को, अस्थियों को, स्नायुओं अर्थात्‌ नसों को, मांस को और मज्जा अर्थात्‌ चरबी को एकत्र किया. हाथपैरों वाले शरीर की रचना कर के सृष्टि रचना करने वाले ब्रह्म ने उस शरीर में आत्मा के रूप में प्रवेश किया. (११)

EN English Translation

At the time of creation, the creator collected hair, bones, nerves, flesh, and marrow i.e. fat. Brahma, who created the universe by creating a body with hands and feet, entered that body in the form of a soul. (11)

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