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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 10 • Mantra 29

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 10 • मन्त्र 29

11.10.29

Mantra ID: 11.10.29

अस्थि॑ कृ॒त्वा स॒मिधं॒ तद॒ष्टापो॑ असादयन् । रेतः॑ कृत्वाज्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन् ॥ (२९)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.10.29 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हड्डियों को समिधा बना कर पहले कहे गए आठ प्रकार के जलों ने पुरुष के शरीर में प्रवेश किया. वीर्य को घृत बना कर देवों ने पुरुष के शरीर में प्रवेश किया. (२९)

EN English Translation

By making bones samidha, the eight types of water mentioned earlier entered the man's body. The gods entered the man's body by making semen. (29)

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