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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 11 • Mantra 18

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 11 • मन्त्र 18

11.11.18

Mantra ID: 11.11.18

उद्वे॑पय॒ त्वम॑र्बुदे॒ऽमित्रा॑णाम॒मूः सिचः॑ । जयां॑श्च जि॒ष्णुश्चा॒मित्राँ॒ जय॑ता॒मिन्द्र॑मेदिनौ ॥ (१८)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.11.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अर्बुदि नाम के सर्प! विष की अधिकता के कारण हमारे शत्रुओं की जो सेनाएं दुखी हैं, उन्हें कंपित करो. हे विजय प्राप्त करने वाले अर्बुदि और न्यर्बुदि नाम के सर्पो! तुम हमारे शत्रुओं को पराजित करते हुए विजयी बनो एवं इंद्र के साथ मिल कर हमें विजयी बनाओ. (१८)

EN English Translation

O serpent named Arbudi! Shake the armies of our enemies who are unhappy due to the excess of poison. O serpents named Arbudi and Nyarbudi who conquered! You defeat our enemies and become victorious and together with Indra make us victorious. (18)

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