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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 5 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 5 • मन्त्र 13

11.5.13

Mantra ID: 11.5.13

तत॑श्चैनम॒न्याभ्या॑मू॒रुभ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न् । ऊ॒रू ते॑ मरिष्यत॒ इत्ये॑नमाह । तं वा अ॒हं ना॒र्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म् । मि॒त्राव॑रुणयोरू॒रुभ्या॑म् । ताभ्या॑मेनं॒ प्राशि॑षं॒ ताभ्या॑मेनमजीगमम् । ए॒ष वा ओ॑द॒नः सर्वा॑ङ्गः॒ सर्व॑परुः॒ सर्व॑तनूः । सर्वा॑ङ्ग ए॒व सर्व॑परुः॒ सर्व॑तनूः॒ सं भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.5.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गुरु अपने शिष्य से इस प्रकार कहे 'हे देवदत्त! पूर्ववर्ती अनुष्ठानकर्ता ऋषियों ने इस ओदन का सेवन जिन जंघाओं की सहायता से किया, यदि तुम ने उस से भिन्न अर्थात्‌ लौकिक जंघाओं की सहायता से इस का सेवन किया तो तुम्हारी जंघाएं नष्ट हो जाएंगी.' इसे उत्तर के रूप में शिष्य अपने गुरु से निवेदन करे-“मैं ने उस ओदन का सेवन न पराङ्मुख हो कर किया है, न सामने से किया है और न आत्माभिमुख हो कर किया है. मैं ने इस ओदन का सेवन मित्र और वरुण रूपी जंघाओं की सहायता से किया है. इसे जहां जाना चाहिए था, मैं ने उसे वहीं पहुंचा दिया है. यह ओदन समस्त अंगों से युक्त, सभी जोड़ों वाला और संपूर्ण शरीर सहित है. इस विधि से जो इस ओदन का सेवन करना जानता है, वह समस्त अंगों सहित, सभी जोड़ों से युक्त और संपूर्ण शरीर वाला होता है. वह स्वर्ग आदि पुण्यलोकों में प्रतीक्षित होता है.' (१३)

EN English Translation

The Guru should say to his disciple thus, 'O Devdatta! If you consume this odan with the help of the thighs with which the previous ritualists consumed this odan, then your thighs will be destroyed. It has not been done from the front, nor by the spirit. I have consumed this odan with the help of friends and varuna thighs. I have taken it where it should have gone. This odan is full of all organs, all joints and with the whole body. By this method, the one who knows how to consume this odan is full of all the organs, all joints and the whole body. He is awaited in the virtuous worlds like heaven etc. (13)

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