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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 5 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 5 • मन्त्र 2

11.5.2

Mantra ID: 11.5.2

ब्र॒ध्नलो॑को भवति ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपि॑ श्रयते॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.5.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो पुरुष ओदन के सूर्य मंडल में स्थित होने के विषय में जानता है, वह सूर्य मंडल में स्थित होता है तथा सूर्य मंडल रूप स्थान में आश्रय पाता है. (२)

EN English Translation

The man who knows about odan being located in the solar system is located in the solar system and finds shelter in the sun system. (2)

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