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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 8 • Mantra 22

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 8 • मन्त्र 22

11.8.22

Mantra ID: 11.8.22

या दे॒वीः पञ्च॑ प्र॒दिशो॒ ये दे॒वा द्वाद॑श॒र्तवः॑ । सं॑वत्स॒रस्य॒ ये दंष्ट्रा॒स्ते नः॑ सन्तु॒ सदा॑ शि॒वाः ॥ (२२)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.8.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पांच प्रधान दिशाओं की जो देवियां हैं तथा बारह मासों के स्वामी जो देव हैं और स्वतंत्र रूप प्रजापति की जो दाढ़ें अर्थात्‌ पक्ष, सप्ताह आदि हैं, वे हमें पाप से मुक्त करें. (२२)

EN English Translation

May the goddesses of the five principal directions and the swami of twelve months who are gods and independently the molars of Prajapati i.e. Paksha, Week etc., free us from sin. (22)

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