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12.1.13
यस्यां॒ वेदिं॑ परिगृ॒ह्णन्ति॒ भूम्यां॒ यस्यां॑ य॒ज्ञं त॒न्वते॑ वि॒श्वक॑र्माणः । यस्यां॑ मी॒यन्ते॒ स्वर॑वः पृथि॒व्यामू॒र्ध्वाः शु॒क्रा आहु॑त्याः पु॒रस्ता॑त् । सा नो॒ भूमि॑र्वर्धय॒द्वर्ध॑माना ॥ (१३)
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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यज्ञ में आहुति देने से पूर्व ही जिस पृथ्वी पर लकड़ी के स्तंभ गाढ़े जाते हैं, वह पृथ्वी स्वयं वृद्धि को प्राप्त कर के हमें समृद्धिशाली बनाए. (१३)
EN English Translation
Even before offering sacrifice in the yajna, the earth on which the wooden pillars are thickened, that earth itself attains growth and makes us prosperous. (13)