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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 29

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 29

12.1.29

Mantra ID: 12.1.29

वि॒मृग्व॑रीं पृथि॒वीमा व॑दामि क्ष॒मां भूमिं॒ ब्रह्म॑णा वावृधा॒नाम् । ऊर्जं॑ पु॒ष्टं बिभ्र॑तीमन्नभा॒गं घृ॒तं त्वा॑भि॒ नि षी॑देम भूमे ॥ (२९)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.29 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धर्मरूपिणी, परम पवित्रा तथा मंत्रों के द्वारा बढ़ने वाली पृथ्वी की मैं स्तुति करता हूं. हे पृथ्वी! तू पोषक अन्न और बल को धारण करने वाली है. मैं तुझ पर घृत की आहुति देता हूं. (२९)

EN English Translation

I praise Dharmarupini, the supreme purity and the earth that grows through mantras. O earth! You are going to possess nutritious food and strength. I sacrifice hatred on you. (29)

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