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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 10 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 10 • मन्त्र 10

12.10.10

Mantra ID: 12.10.10

आ द॑त्से जिन॒तां वर्च॑ इ॒ष्टं पू॒र्तं चा॒शिषः॑ ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.10.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ब्राह्मण की गाय! तू अपहरण करने वाले के तेज, कामना, पूर्त और आशीर्वादात्मक शब्दों का हरण करती है. (१०)

EN English Translation

O Brahmin's cow! You remove the swift, wishful, fulfilled and blessing words of the abductor. (10)

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