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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 2 • Mantra 29

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 2 • मन्त्र 29

12.2.29

Mantra ID: 12.2.29

उ॑दी॒चीनैः॑ प॒थिभि॑र्वायु॒मद्भि॑रति॒क्राम॒न्तोऽव॑रा॒न्परे॑भिः । त्रिः स॒प्त कृत्व॒ ऋष॑यः॒ परे॑ता मृ॒त्युं प्रत्यौ॑हन्पद॒योप॑नेन ॥ (२९)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.2.29 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

परलोक गमन में वायु से पूर्ण उत्तरायण मार्ग में जाने वाले ऋषियों ने निकृष्ट मार्गो को लांघा था. उन्होंने मृत्यु को भी इक्कीस बार पार किया था. (२९)

EN English Translation

In the journey of the hereafter, the sages who went from air to the full Uttarayan path had crossed the bad paths. He had also crossed death twenty-one times. (29)

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