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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 2 • Mantra 31

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 2 • मन्त्र 31

12.2.31

Mantra ID: 12.2.31

इ॒मा नारी॑रविध॒वाः सु॒पत्नी॒राञ्ज॑नेन स॒र्पिषा॒ सं स्पृ॑शन्ताम् । अ॑न॒श्रवो॑ अनमी॒वाः सु॒रत्ना॒ आ रो॑हन्तु॒ जन॑यो॒ योनि॒मग्रे॑ ॥ (३१)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.2.31 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये स्त्रियां सुंदर पतियों से युक्त रहें. ये विधवा न हों. ये अश्रुओं से रहित और घृत से युक्त हों. ये सुंदर अलंकारों को धारण करने वाली हों तथा संतानोत्पत्ति के हेतु मनुष्य योनि में ही रहें. (३१)

EN English Translation

These women should be full of beautiful husbands. They should not be widows. They should be devoid of tears and full of tears. They should wear beautiful ornaments and humans should remain in the vagina for childbirth. (31)

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