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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 2 • Mantra 36

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 2 • मन्त्र 36

12.2.36

Mantra ID: 12.2.36

यत्कृ॒षते॒ यद्व॑नुते॒ यच्च॑ व॒स्नेन॑ वि॒न्दते॑ । सर्वं॒ मर्त्य॑स्य॒ तन्नास्ति॑ क्र॒व्याच्चेदनि॑राहितः ॥ (३६)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.2.36 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो पुरुष क्रव्याद अग्नि का सेवन करना न छोड़े, उस की कृषि, सेवनीय वस्तु, बहुमूल्य वस्तु आदि जो उस के पास है, वे शून्य के समान रह जाती हैं. (३६)

EN English Translation

The man who does not stop consuming the agni, his agriculture, food items, valuable things, etc. which he has, remain like zero. (36)

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