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12.3.11
ध्रु॒वेयं वि॒राण्नमो॑ अस्त्व॒स्यै शि॒वा पु॒त्रेभ्य॑ उ॒त मह्य॑मस्तु । सा नो॑ देव्यदिते विश्ववार॒ इर्य॑ इव गो॒पा अ॒भि र॑क्ष प॒क्वम् ॥ (११)
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अथर्ववेद मन्त्र 12.3.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यह वरण करने योग्य तथा खंड न होने वाली पृथ्वी है. यह हमारे लिए सुख देने वाली हो. यह हमारे पुत्रों का मंगल करे तथा नियुक्त रक्षक के समान यह ओदन की रक्षा करे. (११)
EN English Translation
It is a selectable and non-fragmentable earth. It will give us happiness. May it bless our sons and protect odan like an appointed protector. (11)