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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 3 • Mantra 37

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 3 • मन्त्र 37

12.3.37

Mantra ID: 12.3.37

उप॑ स्तृणीहि प्र॒थय॑ पु॒रस्ता॑द्घृ॒तेन॒ पात्र॑म॒भि घा॑रयै॒तत् । वा॒श्रेवो॒स्रा तरु॑णं स्तन॒स्युमि॒मं दे॑वासो अभि॒हिङ्कृ॑णोत ॥ (३७)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.3.37 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तुम इसे परोस कर फैलाओ तथा इस में घी डालो. हे देवगण! दूध पीने वाले को देख कर दुधारू गाएं दूध पीने वाले बछड़े को देखकर शब्द करती हुई जिस प्रकार उस की ओर दौड़ती हैं, उसी प्रकार इस तैयार ओदन की ओर तुम शब्द करो. (३७)

EN English Translation

You serve it and spread it and add ghee to it. O Gods! Looking at the milk drinker, the milch cows look at the calf drinking milk and run towards it, in the same way, you should say words towards this ready odan. (37)

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