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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 3 • Mantra 52

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 3 • मन्त्र 52

12.3.52

Mantra ID: 12.3.52

यद॒क्षेषु॒ वदा॒ यत्समि॑त्यां॒ यद्वा॒ वदा॒ अनृ॑तं वित्तका॒म्या । स॑मा॒नं तन्तु॑म॒भि सं॒वसा॑नौ॒ तस्मि॒न्त्सर्वं॒ शम॑लं सादयाथः ॥ (५२)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.3.52 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

द्यूत कर्म में अथवा युद्ध में धन प्राप्ति की अभिलाषा से तुम ने जो मिथ्या भाषण किया है, समस्त तंतुओं से बने इस वस्त्र से ढकते हुए अग्नि में उस दोष को प्रविष्ट कर दो. (५२)

EN English Translation

Cover this cloth made of all the fibers and enter that defect in the agni, which you have made false speeches with the desire to get money in gaming or in war. (52)

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