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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 11

12.4.11

Mantra ID: 12.4.11

य ए॑नां व॒निमा॒यन्ति॒ तेषां॑ दे॒वकृ॑ता व॒शा । ब्र॑ह्म॒ज्येयं॒ तद॑ब्रुव॒न्य ए॑नां निप्रिया॒यते॑ ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो लोग गाय को परम प्रिय समझते हुए उस की सेवा करते हैं उन के लिए यह ब्रह्मज्या होती है, ऐसा विद्वानों का कथन है. (११)

EN English Translation

For those who consider the cow as the most beloved and serve it, it is brahmajya, it is the statement of scholars. (11)

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