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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 14

12.4.14

Mantra ID: 12.4.14

यथा॑ शेव॒धिर्निहि॑तो ब्राह्म॒णानां॒ तथा॑ व॒शा । तामे॒तद॒च्छाय॑न्ति॒ यस्मि॒न्कस्मिं॑श्च॒ जाय॑ते ॥ (१४)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वशा गाय ब्राह्मणों की धरोहर के समान होती है. यह गाय वास्तव में ब्राह्मणों की ही है. वह चाहे जिस के घर में प्रकट हो जाए, ये ब्राह्मण गोस्वामी के सामने आ कर इस गाय को मांगते हैं. (१४)

EN English Translation

Vasha cow is like the heritage of Brahmins. This cow actually belongs to Brahmins. No matter whose house he appears in, these Brahmins come in front of Goswami and ask for this cow. (14)

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