Popular:
अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 21

12.4.21

Mantra ID: 12.4.21

हेडं॑ पशू॒नां न्येति ब्राह्म॒णेभ्योऽद॑दद्व॒शाम् । दे॒वानां॒ निहि॑तं भा॒गं मर्त्य॒श्चेन्नि॑प्रिया॒यते॑ ॥ (२१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 12.4.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो पुरुष देवताओं की धरोहर रूप भाग को अपना अत्यंत प्रिय समझता है, वह ब्राह्मणों को वशा का दमन करने के कारण पशुओं का क्रोध प्राप्त करता है. (२१)

EN English Translation

The man who considers the heritage part of the gods as his most beloved, he gets the wrath of the animals due to the suppression of the Brahmins. (21)

卐 HinduText AI