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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 27

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 27

12.4.27

Mantra ID: 12.4.27

याव॑दस्या॒ गोप॑ति॒र्नोप॑शृणु॒यादृचः॑ स्व॒यम् । चरे॑दस्य॒ ताव॒द्गोषु॒ नास्य॑ श्रु॒त्वा गृ॒हे व॑सेत् ॥ (२७)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.27 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गौ का स्वामी जब तक गौ के संबंध में कोई संकल्प न करे, तब तक वह उस की गायों में विचरे, फिर उस के घर में वास न करे. (२७)

EN English Translation

Unless the owner of the cow makes a resolution regarding the cow, he should wander in his cows, then do not live in his house. (27)

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